कहानि: "वो खोई हुई मुस्कान"

 

कहानि: "वो खोई हुई मुस्कान" rachanadhara
 कहानि: "वो खोई हुई मुस्कान"

कहानि: "वो खोई हुई मुस्कान"

गाँव में एक छोटा सा घर था, जहाँ एक प्यारी सी लड़की पंखुरी अपने माता-पिता के साथ रहती थी। पंखुरी की मुस्कान गाँव भर में मशहूर थी। उसके चेहरे पर हमेशा एक नन्ही सी मुस्कान रहती थी, जैसे सूरज की किरण हर वक्त उसके साथ हो। हर कोई पंखुरी से मिलने के लिए बेताब रहता था। उसका नाम खुद में एक खुशबू सा था, जो लोगों के दिलों में बस जाता।

लेकिन एक दिन, कुछ ऐसा हुआ कि पंखुरी की मुस्कान जैसे कहीं खो गई। वह बहुत चुप रहने लगी, उसकी आँखों में वह चमक नहीं रही जो पहले होती थी। उसके दोस्त भी हैरान थे, माँ-बाप भी परेशान थे। किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर पंखुरी के साथ क्या हुआ।

एक दिन, गाँव में एक बुजुर्ग महिला आई, जो हमेशा पेड़ के नीचे बैठकर गाँववालों से बातें करती थी। लोग कहते थे कि वह एक जादूगरनी है, जो हर समस्या का हल जानती है। पंखुरी की माँ उसे लेकर उस महिला के पास गई। महिला ने पंखुरी को ध्यान से देखा और कहा, "तुम्हारी मुस्कान कहीं खो गई है, क्योंकि तुम कुछ बड़ा ग़म छिपा रही हो। तुम्हें अपनी मुस्कान वापस पाने के लिए अपना ग़म दुनिया से बाँटना होगा।"

पंखुरी ने धीरे-धीरे अपना ग़म सबको बताना शुरू किया। उसने बताया कि एक दिन वह अपने पालतू कुत्ते मिटी को बहुत प्यार करती थी, लेकिन एक दिन मिटी अचानक बिमार हो गया और मर गया। वह इस ग़म को बहुत गहरे दिल में छिपा कर बैठी थी, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसकी मुस्कान गायब हो जाए।

बुजुर्ग महिला मुस्कुराई और बोली, "ग़म को दिल में दफन करने से वह और बढ़ता है। उसे किसी से बांटना जरूरी है। अपने दर्द को बाहर निकालो, और देखो तुम कैसी मुस्कान वापस पाती हो।"

पंखुरी ने सोचा और अगले ही दिन, उसने गाँव के बच्चों से अपनी दुखभरी कहानी बताई। बच्चों ने उसे समझाया और साथ में खेलते हुए उसका मन बहलाया। पंखुरी को एहसास हुआ कि ग़म बांटने से वह हल्का महसूस कर रही थी और उसकी मुस्कान धीरे-धीरे वापस लौटने लगी।

कुछ दिनों बाद, पंखुरी की मुस्कान पहले से भी अधिक खिल उठी। उसने समझा कि दर्द और खुशी दोनों को बाँटने से ही जिंदगी में संतुलन आता है। गाँव में अब पंखुरी की मुस्कान और भी ज्यादा प्यारी हो गई, क्योंकि अब वह सच्ची मुस्कान थी — जो दिल से निकलती थी, न कि सिर्फ चेहरे से।

इस तरह, पंखुरी ने अपने ग़म को साझा कर, अपनी खोई हुई मुस्कान को फिर से पाया और उसे अपनी दुनिया में सबसे खूबसूरत तोहफे की तरह सहेजा।

समाप्त।

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